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अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार आरोपी अब जेल के भीतर एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हो गए हैं। कभी एक साथ मिलकर पूरी योजना को अंजाम देने वाले ये आरोपी अब आपसी विवाद और अविश्वास में बंट गए हैं।

UP News : अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार आरोपी अब जेल के भीतर एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हो गए हैं। कभी एक साथ मिलकर पूरी योजना को अंजाम देने वाले ये आरोपी अब आपसी विवाद और अविश्वास में बंट गए हैं। स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि जेल परिसर के भीतर उनके बीच तीखी बहस और मारपीट तक की नौबत आ गई है। सूत्रों के अनुसार, पिछले दो दिनों से आरोपियों के बीच लगातार तनाव बना हुआ है और वे एक-दूसरे पर ही मामले को उजागर करने का आरोप लगा रहे हैं। इसी खींचतान का असर यह हुआ है कि अब वे एक-दूसरे की भूमिका और राज खोलने लगे हैं। UP News
जेल सूत्रों के मुताबिक, सभी आरोपी इस बात से परेशान हैं कि उनकी कथित “संगठित योजना” इतनी जल्दी कैसे पकड़ी गई। हर आरोपी किसी न किसी को जिम्मेदार ठहराते हुए खुद को अलग साबित करने की कोशिश कर रहा है। कुछ आरोपियों का कहना है कि योजना में शामिल एक व्यक्ति का लापरवाह व्यवहार पूरे नेटवर्क के लिए भारी पड़ा, जबकि कुछ अन्य इसे आपसी गलतफहमी और लालच का परिणाम बता रहे हैं। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम को लेकर जेल प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर कोई बयान नहीं दिया है। UP News
न्यायालय की अनुमति के बाद जेल में पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ की, जिसमें सबसे पहले अविनाश शुक्ला से सवाल-जवाब किए गए। बताया जाता है कि बरामद 20 लाख 40 हजार रुपये के मामले में उसकी भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है। करीब एक घंटे चली पूछताछ की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई है। पुलिस ने इस दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाई हैं, जिनमें कुछ अन्य लोगों की संलिप्तता के संकेत भी मिले हैं। UP News
अयोध्या की कौशलपुरी कॉलोनी में किराए के मकान में रहने वाला अविनाश शुक्ला कुछ ही समय में आर्थिक रूप से मजबूत हो गया था, जिस पर पहले से ही स्थानीय लोगों को संदेह था।
पुलिस अब उसके पैतृक गांव प्रतापगढ़ में भी जांच कर चुकी है। जांच में यह भी सामने आया है कि उसके रहन-सहन और जीवनशैली में हाल के महीनों में अचानक बड़ा बदलाव आया था। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपी ने कुछ अन्य लोगों के नाम भी लिए हैं, जो कथित रूप से पैसे की हेराफेरी और उसके ट्रांसफर में शामिल थे। पुलिस अब इन नए नामों की भूमिका की जांच कर रही है और जल्द ही उनके खिलाफ कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल कुछ लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका नेटवर्क और बड़ा हो सकता है। UP News
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