विज्ञापन
अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़ी वर्ष 2021 की जमीन खरीद एक बार फिर विवादों के घेरे में है। इस मामले में आरोप है कि एक ही जमीन को कुछ ही घंटों के भीतर अलग-अलग कीमतों पर खरीदा और बेचा गया, जिससे पारदर्शिता और प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

UP News : अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़ी वर्ष 2021 की जमीन खरीद एक बार फिर विवादों के घेरे में है। इस मामले में आरोप है कि एक ही जमीन को कुछ ही घंटों के भीतर अलग-अलग कीमतों पर खरीदा और बेचा गया, जिससे पारदर्शिता और प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
UP News
यह विवाद मार्च 2021 की उस जमीन डील से जुड़ा है, जिसमें अयोध्या में राम मंदिर परिसर के विस्तार के लिए जमीन खरीदी गई थी। आरोपों के मुताबिक, एक जमीन की दो अलग-अलग रजिस्ट्रियां कुछ ही समय के अंतराल में हुईं, जिससे कीमत में भारी अंतर देखने को मिला। कीमत के बीच भारी अंतर था जो पूरी तरह से सुनियोजित बंपर कमाई का माध्यम बनाया गया। रिपोर्ट्स और दस्तावेजों के अनुसार 18 मार्च 2021 को पहले चरण में जमीन लगभग 2 करोड़ रुपये में बेची गई। कुछ ही समय बाद वही जमीन 18.5 करोड़ रुपये में ट्रस्ट को बेची गई। इस तरह की अंतर वाली ज्यादातर डील की गई, जो संदेह के घेरे में है। इस पूरे घटनाक्रम ने सवाल खड़ा किया कि आखिर कुछ ही घंटों में जमीन की कीमत कई गुना कैसे बढ़ गई।
UP News
जानकारी के अनुसार उस समय जमीन का सरकारी सर्किल रेट लगभग 5.79 करोड़ रुपये के आसपास बताया जाता है। ऐसे में पहली डील 2 करोड़ रुपये जबकि दूसरी डील 18.5 करोड़ रुपये की हुई। इस अंतर ने डील की वैल्यू और मूल्य निर्धारण प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए। आरोपों के मुताबिक इस डील में पहले निजी पक्षों के बीच जमीन का सौदा हुआ और फिर कुछ ही घंटों बाद वही जमीन ट्रस्ट को बेची गई। विवाद का केंद्र यह भी है कि मध्यवर्ती खरीद-बिक्री से कीमत में अचानक भारी उछाल कैसे आया।
UP News
2021 में ही इस मामले पर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया था। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि जमीन खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं थी। कीमत कृत्रिम रूप से बढ़ाई गई हो सकती है। पूरे सौदे की सीबीआई स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। हालांकि ट्रस्ट की ओर से इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा गया था कि सभी लेनदेन कानूनी प्रक्रिया और बैंकिंग माध्यम से किए गए थे। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पहले स्पष्ट किया था कि जमीन खरीद पूरी तरह रिकॉर्ड पर आधारित है। कीमत बढ़ने का कारण क्षेत्र का तेजी से बढ़ता बाजार मूल्य है और सभी लेनदेन बैंकिंग चैनल से किए गए हैं।
UP News
अब यह मामला दोबारा चर्चा में इसलिए आया है क्योंकि पुराने दस्तावेज फिर से सामने आ रहे हैं। जमीन की वैल्यू और टाइमिंग पर सवाल दोहराए जा रहे हैं, इसीके साथ पारदर्शिता और प्रक्रिया पर राजनीतिक बहस तेज हो रही है। 2021 की यह जमीन डील अब भी एक विवादित विषय बनी हुई है। जहां एक पक्ष इसे कानूनी और बाजार आधारित सौदा बताता है, वहीं दूसरा पक्ष इसमें अनियमितताओं की आशंका जताता है। फिलहाल यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा में बना हुआ है।
UP News
विज्ञापन