दुनिया भर में फैल रही है मेहंदीपुर वाले बालाजी की महिमा, रोज होते हैं चमत्कार
Mehandipur Balaji
भारत
RP Raghuvanshi
18 Nov 2025 02:55 PM
भारत
RP Raghuvanshi
18 Nov 2025 02:55 PM
Mehandipur Balaji : शायद ही कोई ऐसा हनुमान भक्त हो जिसने मेहंदीपुर बालाजी का नाम नहीं सुना होगा। मेहंदीपुर बालाजी के मंदिर की महिला पूरे भारत वर्ष में प्रसिद्ध है। इतना ही नहीं मेहंदीपुर वाले बाला जी मंदिर की महिमा पूरी दुनिया में फैल रही है। भारत ही नहीं दुनिया भर से हनुमान के भक्त मेहंदीपुर बालाजी के मंदिर में दर्शन करने आते हैं। हर साल करोड़ों की संख्या में भगवान हुनमान के भक्त मेहंदीपुर बाला जी के मंदिर की यात्रा करते हैं।
राजस्थान के दौसा में स्थापित है मेहंदीपुर बालाजी का मंदिर
भारत के राजस्थान प्रदेश में बड़ी संख्या में भगवान हनुमान जी के मंदिर हैं। राजस्थान के दौसा जिले में मेहंदीपुर गांव में स्थापित है मेहंदीपुर बाला जी का मंदिर। मेहंदीपुर बाला जी के मंदिर में हर रोज एक से बढक़र एक चमत्कार देखने को मिलते हैं। मेहंदीपुर बाला जी के मंदिर में भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आपको बता दें कि मेहंदीपुर बालाजी मंदिर भारत के राजस्थान राज्य के दौसा जिले में स्थित एक हिंदू मंदिर है, जो बजरंगबली हनुमान जी को समर्पित है। यह मंदिर भारत में इतना लोकप्रिय है कि यहां हर साल दूर-दूर से करोड़ों तीर्थ यात्री अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आते हैं। इसी प्रकार दुनिया भर के तमाम देशों में भी मेहंदीपुर बालाजी के मंदिर की महिमा बढ़ती जा रही है। हनुमान भक्त जानते हैं कि हनुमान जी को ही बालाजी के रूप में भी जाना जाता है।
मेहंदीपुर बालाजी में बाला जी हनुमान के मंदिर के सामने सियाराम को समर्पित एक मंदिर भी स्थित है जिसमें सियाराम की एक सुंदर मूर्ति स्थापित है। मेहंदीपुर बालाजी मंदिर के बारे में ऐसा माना जाता है कि भगवान अपने भक्तों को बुरी आत्माओं और परेशानियों से मुक्ति दिलाते हैं। मंदिर में आने वाले भक्त बालाजी को बूंदी के लड्डू का भोग लगाते हैं और भैरव बाबा को उड़द की दाल व चावल चढ़ाते हैं जो बुरी आत्माओं से मुक्ति पाने में उनकी मदद करते हैं। मंदिर में शनिवार और मंगलवार को भीड़ काफी ज्यादा होती है क्योंकि यह बालाजी के सबसे खास दिन होते हैं।
मेहंदीपुर बालाजी मंदिर में तीन भगवानों की पूजा की जाती है। लेकिन इस मंदिर में मुख्य रूप से हनुमान जी की पूजा होती है और इसके अलावा यहां प्रेतराज सरकार और भैरव बाबा को भी पूजा जाता है। मंदिर के इन तीनों देवताओं को भूतों, प्रेतों और आत्माओं से संबंधित माना जाता है। मंदिर में बालाजी की जिस मूर्ति की पूजा की जाती है उसके बारे में यह कहा जाता है कि यह मूर्ति अपने आप प्रकट हुई थी। बताया जाता है कि इस जगह पर हनुमान जी की लीला बालकाल से ही शुरू हो गई थी इसलिए इस मंदिर को बालाजी के नाम से जाना जाता है। भक्तों का मानना है कि इस मंदिर में एक दिव्य शक्ति है जो बुरी आत्माओं के चंगुल में फंसे लोगों को ठीक करने की ताकत रखती है। अगर आप लौकिक शक्तियों या भूतों पर विश्वास नहीं करते तो इस मंदिर में आने के बाद आप इन सभी चीजों पर विश्वास करने लगेंगे।
मेहंदीपुर बालाजी का पूरा इतिहास Mehandipur Balaji
मेहंदीपुर बालाजी मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है जिसका अपना एक समृद्ध और रोचक इतिहास रहा है। इस मंदिर का इतिहास लगभग 1000 साल पुराना है। मान्यताओं के अनुसार अरावली की पहाडिय़ों के बीच बसे इस मंदिर में स्थित भगवान हनुमान जी की मूर्ति स्वयंभू है, मतलब इसे किसी के द्वारा बनाया नहीं गया बल्कि ये अपने आप प्रकट हुई है। आज यह मंदिर जिस जगह स्थित है वहां पहले एक घना जंगल था और यहीं मंदिर के वर्तमान महंत जी के पूर्वजों को बालाजी की मूर्ति की अनुभूति हुई थी। जिसके बाद उन्होंने यही रुक कर इसकी पूजा करने का निश्चय किया। दंतकथा के अनुसार एक दिन हनुमान जी बालाजी और प्रेतराज सरकार तीनों महंत जी के सपने में आए और उन्होंने उनसे से अपनी सेवा-पूजा करने को कहा। इस घटना के बाद उन्होंने यहां भगवान हनुमान की पूजा करनी शुरू कर दी और भव्य मंदिर का निर्माण भी कराया।
मेहंदीपुर बालाजी का मंदिर चमत्कारी शक्तियों से भरा हुआ है और जो भी भक्त सच्चे मन से यहां आता है उसे बुरी शक्तियों और आत्माओं से मुक्ति मिलती है। इस मंदिर के असीम चमत्कारों के चलते हर दिन लाखों भक्त इस मंदिर पर अपनी अर्जी लगाने आते हैं। मेहंदीपुर बालाजी मंदिर में जाना और यहां पर भूत-प्रेत से पीडि़त लोगों को देखकर भले ही आपको किसी हॉरर फिल्म की याद आ सकती है लेकिन यहां की यात्रा करने वाले कई भक्तों ने यहां आने के बाद अपने आसपास के माहौल में बदलाव का अनुभव किया है।
यह मंदिर राजस्थान में स्थित है जहां पर काफी गर्म वातावरण होता है लेकिन यहां आने के बाद कुछ पलों के लिए आप ठंड का अनुभव करेंगे। यहां आने के बाद भक्तों को काफी भीड़ का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि यहां काफी संख्या में भक्त आते हैं। भले ही आप किसी भी दिन बालाजी के इस मंदिर के दर्शन के लिए आयें लेकिन आपको यहां हमेशा ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मिलेगी। जहां एक तरफ किसी भी मंदिर में हमे घंटियों ओर मंत्रों की आवाजें सुनाई देती है, वहीं मेहंदीपुर बालाजी मंदिर परिसर में कदम रखते ही आपको महिलाओं और पुरुषों के तेज चीखने की आवाजें सुनाई देने लगेंगी। यहां पीडि़त लोगों के चीखने की आवाजें आपको डरा सकती हैं। जहां एक तरफ भारत के अन्य मंदिरों को प्रसाद चढाने के लिए जाना जाता है, वहीं दूसरी ओर महेंदीपुर बालाजी मंदिर एक ऐसी जगह है जहां पर कोई प्रसाद नहीं चढ़ाया जाता।
इस बात में कोई शक नहीं कि यह मंदिर कमजोर दिल वालों को डरा सकता है। जैसे ही आप इस मंदिर के परिसर में प्रवेश करेंगे तो आप अपने आसपास के माहौल में बदलाव महसूस कर सकते हैं। मेहंदीपुर बालाजी मंदिर की वास्तुकला इसकी कहानी और विलक्षणता को दर्शाती है। मंदिर में आने के बाद आपको निश्चित रूप से अपने आसपास नकारात्मकता महसूस होगी। मेहंदीपुर बालाजी मंदिर में कुल चार कक्ष हैं जिसमें से पहले दो कक्ष में हनुमान जी और भैरव जी की मूर्तियां हैं, लेकिन अंतिम दोनों हॉल में जाने के बाद आपको एक भयानक अनुभव मिल सकता है। यहां पर कई पुरुष और महिलाओं को अपना सिर पीटते और हिलाते हुए देखा जा सकता है। यहां इनमे से कई को लोहे की चैन और जंजीरों से बंधा हुआ और जोर-जोर से चिल्लाते हुए भी देखा जाता है।
मेहंदीपुर बालाजी से नहीं लाते हैं प्रसाद
मेहंदीपुर बालाजी मंदिर से वापस जाते समय कोई भी प्रसाद, पानी या खाद्य पदार्थ आदि अपने साथ वापस ले जाना अशुभ माना जाता है। इसके साथ ही मंदिर में किसी भी अनजान से बात करने और छूने से बचने की सलाह भी दी जाती है क्योंकि किसी पीड़ित व्यक्ति को छूने से आप भी प्रभावित हो सकते हैं। इसके साथ ही जब आप मंदिर से जाते हैं तो कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखें क्योंकि इस तरह पीछे देखना किसी बुरी आत्मा को निमंत्रण देने जैसा हो सकता है।
मेहंदीपुर बालाजी मंदिर राजस्थान की राजधानी जयपुर के पास दौसा जिले में स्थित है, यह मंदिर मेहंदीपुर गांव में स्थित है जो जयपुर शहर से करीब 99 किमी दूर है। मंदिर के लिए आप सडक़, हवाई और रेल मार्ग द्वारा यात्रा कर सकते हैं, मंदिर से सबसे निकटतम हवाई अड्डा 110 किलोमीटर की दूरी पर स्थित जयपुर हवाई अड्डा है। मेहँदीपुर बालाजी मंदिर से सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित दौसा रेलवे स्टेशन है। इसके साथ ही यहां पहुंचने के लिए सबसे निकटतम बस अड्डा 49 किलोमीटर की दूरी पर दौसा बस स्टैंड है। Mehandipur Balaji
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