सरकार का कहना है कि इस प्राधिकरण के जरिए नगर सुविधाएं, इंफ्रास्ट्रक्चर और मास्टर प्लानिंग को नई धार मिलेगी जिसका सीधा असर निवेश, रोजगार और जीवन-स्तर पर दिखेग

UP News : उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल को विकास की नई “स्पीड लेन” पर लाने के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘काशी–विंध्य क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण’ के गठन को मंजूरी देकर उत्तर प्रदेश ने वाराणसी से सोनभद्र तक के इलाके को एकीकृत योजना और मजबूत शहरी ढांचे से जोड़ने का रोडमैप तय कर दिया। सरकार का कहना है कि इस प्राधिकरण के जरिए नगर सुविधाएं, इंफ्रास्ट्रक्चर और मास्टर प्लानिंग को नई धार मिलेगी जिसका सीधा असर निवेश, रोजगार और जीवन-स्तर पर दिखेगा।
उत्तर प्रदेश सरकार ने जिस काशी–विंध्य क्षेत्र को प्राधिकरण के दायरे में रखा है, उसमें वाराणसी, जौनपुर, चंदौली, गाजीपुर, मिर्जापुर, भदोही और सोनभद्र शामिल हैं। इन जिलों को एक साझा विकास दृष्टि के साथ जोड़कर इन्फ्रास्ट्रक्चर, आवास, ट्रांसपोर्ट, नगरीय विस्तार, औद्योगिक गतिविधियों और नागरिक सुविधाओं की योजनाओं को एक मंच पर लाने की कवायद मानी जा रही है। सरकारी आकलन के मुताबिक, इस पूरे क्षेत्र की आबादी करीब दो करोड़ के आसपास है। योगी सरकार का कहना है कि प्राधिकरण के गठन से राजकोष पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा, बल्कि बेहतर योजना और संसाधनों के समन्वय से विकास कार्यों को तेज किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश में गठित होने जा रहे काशी–विंध्य क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण का दायरा करीब 23,815 वर्ग किलोमीटर में फैला होगा, यानी यह प्राधिकरण पूर्वांचल के एक बड़े भू-भाग को एक ही विकास फ्रेमवर्क में समेटेगा। जिलावार आंकड़ों के मुताबिक वाराणसी (1,535), जौनपुर (4,038), चंदौली (2,541), गाजीपुर (3,377), मिर्जापुर (4,521), भदोही (1,015) और सोनभद्र (6,788 वर्ग किमी) इस क्षेत्र में शामिल हैं। क्षेत्रफल के लिहाज से सोनभद्र सबसे बड़ा और भदोही सबसे छोटा जिला है—जिससे साफ है कि उत्तर प्रदेश सरकार की योजना शहरी केंद्रों के साथ-साथ दूरस्थ और संसाधन-समृद्ध इलाकों को भी समान विकास धारा में जोड़ने की है। सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि नीति आयोग के सतत विकास से जुड़े सुझावों को रणनीति में शामिल कर इस पूरे क्षेत्र के लिए लॉन्ग-टर्म रोडमैप तैयार किया जाएगा
उत्तर प्रदेश सरकार ने काशी–विंध्य क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण की कमांड स्ट्रक्चर भी साफ कर दी है, ताकि फैसलों में देरी न हो और विकास योजनाओं पर सीधे निगरानी बनी रहे। प्राधिकरण की कार्यकारी समिति की कमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथ में होगी, जबकि प्रमुख सचिव (आवास) को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बनाकर इसे प्रशासनिक ताकत दी गई है। वाराणसी मंडलायुक्त को सदस्य सचिव की अहम जिम्मेदारी मिलेगी और विंध्याचल मंडल के आयुक्त को सदस्य के रूप में जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों के तकनीकी विशेषज्ञों को भी बोर्ड में शामिल करने की व्यवस्था रखी है, ताकि मास्टर प्लानिंग सिर्फ कागज़ों तक सीमित न रहे बल्कि जमीन पर लागू होने वाली, व्यावहारिक और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से मजबूत विकास रणनीति तैयार हो सके।
उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले का सबसे अहम पहलू यह है कि अब सातों जिलों के सुनियोजित विकास का मास्टर प्लान तैयार करने और उसे मंजूरी देने का अधिकार सीधे इसी काशी–विंध्य क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण के पास होगा। यानी मास्टर प्लान के लिए शासन स्तर पर अलग से अनुमोदन की बाध्यता खत्म होगी। इससे परियोजनाओं की मंजूरी और क्रियान्वयन की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। सरकार के मुताबिक, एक-दो दिन के भीतर काशी–विंध्य क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण के गठन की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। इसके बाद प्राधिकरण औपचारिक रूप से काम शुरू करेगा और क्षेत्र के लिए समग्र विकास रोडमैप तैयार किया जाएगा। UP News
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