विश्व पुस्तक मेला 2025: आज से शुरू हो रहा है साहित्य का बड़ा उत्सव
World Book Fair 2025
भारत
RP Raghuvanshi
18 Nov 2025 10:35 AM
भारत
RP Raghuvanshi
18 Nov 2025 10:35 AM
World Book Fair 2025 : राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (NBT) द्वारा आयोजित "विश्व पुस्तक मेला 2025" आज से नई दिल्ली में शुरू हो रहा है। यह मेला 1 से 9 फरवरी तक भारत मंडपम, प्रगति मैदान में आयोजित होगा। भारत के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस भव्य साहित्यिक आयोजन का उद्घाटन आज सुबह 11:30 बजे किया।
इस वर्ष मेला विशेष रूप से भारत के गणतंत्र के 75 वर्षों की यात्रा को समर्पित है, और इसकी थीम "रिपब्लिक@75" रखी गई है। रूस इस मेले का विशेष फोकस देश होगा, और यहां रूसी साहित्य और संस्कृति की एक खास प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जिसमें 1500 से ज्यादा रूसी पुस्तकें शामिल होंगी। इस अवसर पर रूस के प्रतिष्ठित लेखक और कलाकार भी भाग लेंगे।
मेला इस बार वैश्विक साहित्यिक समुदाय को एक साथ लाने का अद्भुत अवसर प्रदान करेगा, क्योंकि इसमें 50 से अधिक देशों के लेखक, वक्ता और प्रकाशक शामिल होंगे। इसमें फ्रांस, कतर, स्पेन, यूएई, सऊदी अरब, कोलंबिया और रूस सहित कई देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।
इस बार मेला में क्या होगा खास?
थीम मंडप : यहां भारत के गणतंत्रात्मक आदर्शों को प्रदर्शित किया जाएगा।
अंतर्राष्ट्रीय फोकस मंडप : रूस की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को देखने का अवसर मिलेगा।
लेखक कोना और लेखक मंच : जाने-माने लेखकों के साथ संवाद का मौका मिलेगा।
बच्चों का मंडप : बच्चों के लिए कहानी, कला और शिल्प सत्र आयोजित किए जाएंगे।
'सभी के लिए पुस्तकें' पहल : ब्रेल पुस्तकों का निःशुल्क वितरण किया जाएगा।
बी2बी अवसर : प्रकाशकों और लेखकों के लिए वैश्विक स्तर पर नेटवर्किंग का मौका।
सांस्कृतिक संध्याएं : भारत की विविधता और सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाते कार्यक्रम।
लेखक लाउंज : लेखकों के लिए विशेष स्थान।
इलस्ट्रेटर कॉर्नर : चित्रकारों के कार्यों का प्रदर्शन।
समय और स्थान
मेला सुबह 11 बजे से लेकर शाम 8 बजे तक खुलेगा। प्रवेश के लिए स्कूल यूनिफॉर्म में छात्रों और वरिष्ठ नागरिकों को निःशुल्क प्रवेश मिलेगा। यह मेला हॉल 2-6, भारत मंडपम (प्रगति मैदान) में आयोजित होगा, और मेट्रो स्टेशन से इसे आसानी से पहुंचा जा सकता है। प्रवेश द्वार के लिए गेट 10, गेट 4 और गेट 3 का उपयोग किया जा सकता है। यह मेला न केवल पुस्तकों का उत्सव है, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और वैश्विक साहित्यिक समुदाय के बीच विचारों के आदान-प्रदान का बेहतरीन मंच भी है।